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कवि परिचय



सुनील कुमार जैन
संपर्क सूत्र:



  sunilkjain1@gmail.com
  +91 93412 85811  
                

संक्षिप्त परिचय:

जन्मः 17 नवम्बर, 1962
जन्म स्थानः मुजफ्फर नगर ( उ.प्र.)
शिक्षाः M.Com., I.C.W.A.( I )
रूचिः कविता, गीत, गजल- सुनना, लिखना व पढना
सम्र्पतिः आधार हाउसिंग को-ऑप. सोसाइटी, बैंगलोर में सचिव के पद पर कार्यरत।



कविता (1)


    मोहब्बत की बातें...

1)

युँही लुटते रहे हम तो खुदा तेरी खुदाई में,
वो भी बेचैन तो होंगे वहाँ मेरी जुदाई में ।
कोई महँगा सा नजराना मैं उनको और क्या देता,
कि अपना दिल ही दे डाला था उनको मुँह दिखाई में।।

2)

हुई है आशिकी जब से बडी मुुश्किल में रहता हूँ,
सभी उसका पता पूछें मैं जिस महफिल में रहता हूँ।
जरूरत क्या मोहब्बत में दरों - दीवार की यारों,
वो मेरे दिल में रहती है मैं उसके दिल में रहता हूँ।।

3)

तुम्हारा नाम आता था हमारी हर इबादत में,
मुझे ही सोचती थी तुम तुम्हारी हर शरारत में।
मिलन ये हो नहीं पाया रहे मजबूर हम दोनों,
कि हम अपनी शराफत में तुम अपनी नजाकत में।।

4)

लिपट के उसके दामन से उन्होनें बन्दगी कर ली,
उसी के नाम पर सबने यूँ अपनी जिन्दगी कर ली।
कि जैसे ही नहाकर के वो निकले झील से बाहर,
तो सारे बुलबुलों नें झील में ही खुदकुशी कर ली।।

5)

कि उनकी आशिकी में हम चलो मशहूर हो जाएँ,
उन्हें हक है कि वो खुद पर जरा मगरूर हो जाएँ।
ऐ मेरे दिल तू उनसे इश्क करना इतनी शिद्दत से,
कि अपने दिल के हाथों आज वो मजबूर हो जाएँ।।

6)

तेरी खुशबू हवाओं में नशा सा घोल देती हैं,
तेरी आँखें तेर दिल की हकीकत खोल देती हैं।
कि तेरी बेरूखी ने मार डाला फिर भी जिन्दा हूँ,
तेरी तस्वीर तन्हाई में हमसे बोल लेती है।।

7)

कि आँखों से पिलाओगे जहर भी आज पी लेंगे,
कि अपनी मौत का इल्जाम अपने सर पे ले लेंगे।
कि मेरी कब्र पे आकर जरा सा मुस्कुरा देना,
तुम्हारा कुछ ना बिगडेगा हम थोडा सा जी लेंगे।।






Satya Prakash Nigam  | 
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इस पृष्ठ के ऑनलाइन प्रकाशित होने की तिथि 22 फ़रवरी 2014 है!


चित्र वीथी

 
 
 




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