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कवि परिचय



प्रकाश चन्द्र उनियाल 'प्रकाश''
संपर्क सूत्र: 203, दितीय तल, जनक रेसीडेंसी
कुमार कृपा रोड बैंगलूरु-560001
दूरभाष: 080-22356489, मो.
  prakash25670@gmail.com
  +91 94481 28482  
                

जन्म: 1970 , ग्राम - गलीगाँव पोस्ट खटलगाँव, पट्टी तत्ला चोकोट जिला अल्मोड़ा (उत्तराखण्ड़)
शैक्षिक योग्यता: एम. ए. राजनितिक विज्ञान व हिन्दी; पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मानवाधिकार
आजीवन सदस्य:
कर्नाटका माउन्टेयनियरिंग एशोसियेशन (के.एम.ए) बैंगलूरु
कर्नाटका फोटोग्राफर एशोसियेशन (के,पी.ए) बैंगलूरु
कार्यकारिणी सदस्य: 'शब्द' साहित्यक संस्था बैंगलूरु
वर्तमान (सम्प्रति): जन सम्पर्क अधिकारी, कुमाऊ मण्डल विकास निगम लि. (उत्तराखण्ड़ सरकार का प्रतिष्ठान)
नo 17 ॐ निवास, 1st फ्लोर, गांधीनगर, बैंगलूरु -560001




कविता (1)


आज के नेता
 
 
आज के नेता दागी है लेकिन चुने हुए हैं
कहने को अपने हैं
लेकिन पराये हैं
आज के नेता दागी है लेकिन चुने हुए हैं

आजादी के समय की बात कुछ और थी
कार्य और व्यवहार में अन्तर न था
अपने लिए कम, समाज को अधिक दिया था
आज के नेता दागी हैं ---------------

वक्त बदला नेता भी बदले हुए है
एक बार पुन : चुन कर क्या आए
वहां की जनता के लिए पराये हुए है
आज के नेता दागी हैं ---------------

आज जहाँ का नेता
वहाँ के अधिकार हुए है
बाकी जनता निहार रही
आज के नेता दागी हैं ---------------

राजनिति में आज बस
धन - बल और बाहुबल चलता है
हो आप कितने सच्चे बस हारते है
आज के नेता दागी हैं ---------------


कविता (2)


हे बादल बरस के जाना
 
 
बादल जब धरती पर बरस बरस के आये
सोचा बादलों ने पर्वतों के दर्शन कर आये
कुछ उनकी और कुछ अपनी सुनाये
सुनते सुनाते बादलो ने पर्वतों से कहा
अब और बरसें या वापस जायें
पर्वतों ने कहा हे बादल तुम खूब बरसो
केवल जल के रूप में नहीं हिम के रूप में भी बरसो
क्योंकि धरती पर मानव जब तुम चले जाओगे
वह पुन: मेरी ओर देखेगा
और कहेगा हे पर्वतराज नदियों को जल से भर दो
तब है बादल तुम न आ सकोगे
पुन : तुम्हारे आने तक
धरती को मैं जल दूँगा
हिस्से गिरने टूटने से
तुम एक न जाना वापस न जाना
आये हो तुम बरसने के लिए
हे बादल बरस के जाना
धरा पर उपकार करते जाना






Satya Prakash Nigam  | 
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इस पृष्ठ के ऑनलाइन प्रकाशित होने की तिथि 22 फ़रवरी 2014 है!


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